हसना, गाना, बजाना तुम से,
तुम से ही गंभीर भी हम हैं।
विनम्रता और आकांक्षायें भी तुमसे,
तुम से हैं और तुम ही से हैं।
धरती से और दिल से कुछ
पास नहीं पर दूर कहाँ।
जो तुम सिखलाये बतलाये,
वो आज भी मुट्ठी-बंद यहां।
हम जिगर के टुकड़ों को पलने
तुमने जिगर अपने परोसे हैं।
३२ साल के अवसर पे, हे !
वो साल जो हमपे बीतें हैं अब,
तुम हमसे जीयो, हम जीएं तुम से।