उस रात आपकी होने वाली बहु को
अपना family tree समझा रहा था।
उसे बतला रहा था कि papa mummy से ज्यादा
मैं ताऊजी ताइजी के साथ सोया हूं।
उस वक्त से एक खयाल है अंदर
की बचपने के retirement के साथ,
कुछ यादें और कुछ रिश्ते भी
दिमाग के एक कोने में रहने लगे हैं,
गुफ्तगू छूट रही है उनसे..
एक आध बार फिर ये भी सोचा कि
कभी बैठेंगे और बतियाएंगे,
आपके साथ उस काठ वाले घर की
यादें फिर दोहराएंगे।
इस खयाल को शायद मैं टालता गया।
फिर जब उस आखिरी दफे आपसे मिला भी,
तो किसी बात पर आपसे खिसिया गया,
उस खयाल को मैं फिरसे खिसका गया।
किसी को खोने पे महसूस होने वाले
इस गम की नीव शायद एक अफसोस है।
कुछ चीज़ें अधूरी रह गई हों,
कुछ बातें अनकही रह गई हों,
ये जज़्बात बेबयां उछलते हैं इस नीव पर।
सबसे पहले तैयार होने के इनाम में मिले
वो सिक्के मुझे बहुत याद आते हैं ताऊजी।
“पवन सीकरिया का भतीजा हूं”,
सैंकड़ों दफे दोहराए ये लफ्ज़ याद आते हैं ताऊजी।
पैर के दर्द से जब सो नहीं पाता तो सुलाते थे,
आपके साथ बीती वो रातें याद आती है ताऊजी।
“Early to bed and early to rise,
makes a man healthy wealthy and wise”
ये बात आपकी बहुत याद आती है ताऊजी।
मुझे दूर से आता देख आपके चेहरे पर आयी
वो हल्की टेढ़ी मुस्कान याद आती है ताऊजी।
किसी से मिलवाती और उन्हें मेरे बचपन की
बातें बतलाती आपकी आवाज याद आती है ताऊजी।
उस आखिरी दफे जब आपसे मिला था,
मेरे वो बद्दीमाग बोल याद आते हैं ताऊजी।
जो किसी बात पर आपसे खिसिया गया था,
हो सके तो मुझे माफ करना ताऊजी।