दोस्त


ऐसा नहि कि भुल गया तुझे
आते रहता है ख़यालों में

तुझसे बातें करने की आदत
तेरे रहते से ही भूल गया
खैर वो जज़्बात फिर कभी
आज मसला कुछ और है

मैं तुझे याद तो करता हूँ
पर तुझसे बतियाता नहीं
इत्तेफ़ाक़ से रोज़ खयाल तो आता है
पर वो खयाल बतलाता नहीं

ज़रा senti हूँ तो कह रहा हूँ
कोशिश करूँगा कभी, बात करने की

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